Tuesday, March 30, 2021

पणजी कला केन्द्र में 28वें हुनर हाट का हुआ आयोजन


  • 500 से अधिक कारीगर, दस्कार ले रहे हैं भाग
  • हुनर हाट भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत मुहिम के थीम पर है आधरित

गोवा के पणजी में कैंपल स्थित कला केन्द्र में स्वदेशी कारीगरों और दस्तकारों के लिए 28 वें हुनर हाट का आयोजन किया जा रहा है। इस हुनर हाट का आयोजन केन्द्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय 28 मार्च से 04 अप्रैल के बीच कर रहा है। गोवा के सीएम डॉ. प्रमोद सावंत ने 28 वें हुनर हाट का उदघाटन किया। हुनर हाट सरकार की स्वदेशी मुहीम को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह हुनर हाट सबका साथ सबका विश्वास के विचार को मजबूती दे रहा है। जरूरतमंद कारीगरों और दस्तकारों को आर्थिक सहायता भी हुनर हाट उपलब्ध करा रहा है। ये बातें गोवा के सीएम डॉ. प्रमोद सावंत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि हुनर हाट न सिर्फ कारीगरों व दस्तकारों को प्रोत्साहित कर रहा है बल्कि यह गोवा के पर्यटन क्षेत्र में भी मददगार साबित हो रहा है। यह विभिन्न प्रदेशों की सांस्कृतिक विविधता को जानने  समझने के लिए भी एक मंच उपलब्ध कराता है।                 केंद्रीय राज्यमंत्री श्रीपद नायक ने कहा कि हुनर हाट देश के कारीगरों और दस्तकारों को बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध  करा रहा है। यह प्रतिभाशाली युवा कारीगरों व दस्तकारो के लिए एक प्रभावशाली मंच बनकर उभरा है। 

            केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अपने संबोधन में कहा कि इस हुनर हाट में 30 राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के 500 से अधिक कारीगर-दस्तकार भाग ले रहे हैं। इसमें भाग ले रहे कारीगरों व दस्तकार स्वनिर्मित स्वदेशी उत्पादों को बिक्री और प्रदर्शन के लिए लाए हैं जो समृद्ध भारत को प्रदर्शित कर रहा है। उन्होंने कहा कि हुनर हाट का आयोजन देश के विभिन्न प्रदेशों में किया जाएगा। यह हुनर हाट ऐसे आयोजनों के माध्यम से रोजगार व रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहा है। 

                                 इस मौके पर राज्यसभा सदस्य विनय तेंदुलकर, गोवा के पूर्व सीएम और निवर्तमान सांसद फ्रांसिस्को गोवा के उपमुख्यमंत्री चंद्रकांत कावलेकर आदि भी उपस्थित थे ।

Saturday, March 27, 2021

67 वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की हुई घोषणा

67 वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की हुई घोषणा

  • 2019 की फिलमों को मिले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
  • छिछोरे को मिला सर्वश्रेष्ठ हिंदी का फिल्म पुरस्कार

22 मार्च को वर्ष 2019 के लिए 67 वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की हुई घोषणा कर दी गई है। पिछले साल वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की हुई घोषणा नहीं हुई थी। इस बार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बिहार के कलाकारों का जलवा रहा। दो राष्ट्रीय पुरस्कार जीत कर इस बार बिहार के कलाकारों ने प्रतिभा का लोहा मनवाया। बिहार की बात करें तो इस बार अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म छिछोरे को सर्वश्रेठ फिल्म का पुरस्कार मिला। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म छिछोरे मानसिक स्वास्थ विषय पर आधारित फिल्म है। इस फिल्म में बॉक्स ऑफिस पर कमाल का प्र्रर्दशन किया था। फिल्म छिछोरे ने समाज को सकारात्मक संदेश देने का काम किया था। वहीं, मनोज बाजपेयी को अभिनेता धनुष के साथ संयुत्त रूप से सर्वश्रेठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। गौरतलब हो कि सर्वश्रेठ अभिनेता का पुरस्कार मनोज बाजपेयी को फिल्म भोसलें के लिए मिला है। अभिनेता मनोज बाजपेयी को इसके पहले 1998 में आई फिल्म सत्या के लिए बेस्ट सपोर्टिंग कलाकार का राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की हुई घोषणा की। ्पिछले साल राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की हुई घोषणा नहीं की गई थी। प्रत्येक वर्ष तीन मई को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की हुई घोषणा की जाती है। 

Tuesday, March 23, 2021

देश की बेटी मिताली राज

 देश की बेटी मिताली राज

वर्तमान समय में खेलो के प्रति जो आकर्षण समाज में है वैसा हमेशा से नहीं रहा है। दशकों पहले कहा जाता था कि पढ़ोगे- लिखोगो तो बनोगे नबाव खेलोगो कूदोगो ते होगे खराब। विशेषकर महिला खिलाड़ियों के प्रति खेल संगठनों का भी रवैया सहयोगात्मक नहीं था। इसके बावजूद महिला खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय ध्वज को ऊंचा करने का ही काम किया है। उन्होंने कभी भी संसाधनों का रोना नहीं रोया। खेला का कोई भी स्तर और फॉमेट हो अपनी प्रतिभा का लोहा खूब मनवाया है। ओलपिंक और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपने प्रदर्शनों से दुनिया को स्तब्ध कर दिया। 

        भारतीय महिला क्रि केट टीम की कप्तान मितालीराज ने 11 मार्च को अपनी उपलब्धि से देश को गर्व करने पर मजबूर कर दिया। मिताली राज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दस हजार लगाने वाली दुनिया की दूसरी महिला क्रिकेटर बन गई हैं। इसके साथ ही मिताली राज ऐसा करने वाली भारत की प्रथम महिला खिलाड़ी हैं। लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम दक्षिण अफ्रीका के विरूध तीसरे एकदिवसीय मैच में 35वां रन पूरा करते ही सह उपलब्धि हासिल की।

चार्लेट एडवडर््स के नाम दर्ज है रिकार्ड


सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकार्ड इंग्लैंड की चार्लोट एडवडर््स के नाम है। चार्लोट एडवडर््स ने महिला क्रिकेट में कुल 10,273 रन बनाए हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया चार्लोट एडवडर््स ने 191 मैचों में 5992 रन बनाए हैं। वहीं मिताली राज ने यह उपलब्धि ने 183 वें मैच में ही हासिल कर ली। मिताली राज ने अपना पहला वनडे मैच जून 1999 में खेला था। मिताली राज ने अपने करियर में रिकार्ड 75 अर्धशतक और सात शतक वनडे मैच में बनाए हैं। टेस्ट मैचों में एक मात्र शतक 2002 में इंग्लैंड के विरूध बनाए हैं।

गांव से गायब होते फाग के राग

गांव से गायब होते फाग के राग

फाल्गुन माह बीतता जा रहा है। इसके बावजूद होली के त्योहार को लेकर लोगों में उत्साह व उमंग का संचार होता नहीं दिख रहा। इस साल होली 29 अप्रैल को मनाया जाएगा। होलिकादहन 28 मार्च को है। ग्रामीण क्षेत्रों में होली की खुमार बसंत पंचमी के दिन से ही शुरू हो जाता है। पहले लोग गोष्ठियों का आयोजन कर होली के गीत गाने में डूब जाते थे लेकिन अब समाज में धीरे-थीरे ये परंपरा कम देखने को मिल रही है। आधुनिकता के रंग में लोग पारंपरिकता को भूलते जा रहे हैं। समाज में अब होलीगीतों के आयोजन की यह परंपरा कम देखने को मिल रही है। 

लोग आधुनिकता के रंग में ऐसे डूबे जा रहे हैं कि अपनी  परंपरागत आचार-विचार व व्यवहार से दूर तक होली के गीतों के लिए होने वाले गोष्ठियों की आवाज सुनाई नहीं दे रही है। एक समय ऐसा भी था जब शाम होते ही दलानों पर लोग एकत्रित कर होली के गीत गाते झूमने लगते थे। बिना किसी ध्वनी विस्तारित यंत्र यानि लाउडस्पीकर के होली गीतों के उत्साह में झूलने लगते थे। 

बच्चे- बूढ़े सब पूरे जोश से शामिल होते थे। होली के बारे में कहा जाता है कि यह आपसी वैमनस्यता, दुश्मनी भुलाकर गले मिलने का अवसर देता है। लोग इस मौके पर आपसी रंजिश भूलाकर होली के रंग में रंग जाते हैं। इस दौरान सब मिलकर फाग गाते हैं। ग्रामिण क्षेत्रों में फाग गीत सुनने को अब नहीं मिल रहा है। एक समय ऐसा भी था जब लोग फाल्गुन मास आते ही ढोल- मंजीरों की थाप और परंपरागत लोकगीतों की गूंज लोगों को आह्लादित कर देते थे। अब समय के साथ-साथ पारंपारिकता लुप्त होती जा रही है। हालांकि गांव के जो बड़े बुजुर्ग लोग हैं वह अपने साथ लेकर कुछ युवाओं को इस परंपरा को जीवित करने की कवायद में लगे हुए हैं। 

दुर्भाग्य से होली मिलन समारोहों में पांरम्परिक लोग गीतों का स्थान भोजपुरी अश्लील गीतों ने लिया है। लोग नशे में डूब जाते हैं। और बेहोशी की हालत में अपने घर जाते हैें। इस मौके पर ध्यान देने वाली बात यह है कि ये होली का त्योहार हमारे संस्कृति की धरोहर है। 

अनामिका को मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार

  • हिंदी में कवियत्री अनामिका को मिला यह पुरस्कार
  • बीस भाषाओं के लेखकों को किया गया सम्मानित

हिंदी की कवियत्री अनामिका को 2020 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। यह सम्मान अनामिका को उनके काव्य संग्रह टोकरी में दिगंत के लिए वर्ष 2020 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है। अनामिका हिंदी के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाली बिहार की तीसरी साहित्यकार हैं। इसके पहले यह पुरस्कार राष्ट्रकवि दिनकर जी और अरूण कमल को मिल चुका है। कवियत्री अनामिकाजी को साहित्य अकादमी पुरस्कार यह पुरस्कार मिला यह बिहार के लिए गौरव की बात है। इस पुरस्कार मिलने से प्रदेश के साहित्यकारों एवं संस्कृतिकर्मियों में खुशी की लहर है। 

कौन है कवियत्री अनामिका 

अनामिका दिल्ली विवि के सत्यवती कॉलेज में अंग्रेजी विषय की शिक्षिका हैं। उनका जन्म प्रदेश के मुज्जफरपुर जिले में हुआ है। अनामिका जी के माता-पिता दोनों ही पोफेसर हैं। उनके पिता छायावाद दौर के लोकप्रिय कवि गीतकार एवं पद्मश्री से विभूषित बिहार विवि के कुलपति व विभागाध्यक्ष श्यामनदंन किशोर हैं। उनकी मां डॉ. आशा किशोर भी बिहार विवि में हिंदी विभागाध्यक्ष रहीं। अनामिकाजी के काव्य संग्रह टोकरी में दिगंत में उन्होंने मुज्जफरपुर शहर की स्त्रियां अपने सपनों और विडंबनाओं के साथ कैसे जुझ रही हैं, को दिखाया है।  कैसे मुज्जपरपुर शहर में आज की स्त्री के सामने स्थितियां अधिक जटिल हैं। उन्हें नट की तरह एक साथ कई रस्सियों को साधना होता है। आज की स्त्री का भावलोक घर से बाहर तक विस्तृत हैं। नई चुनौतियों को वे समरसता से साध रही हैं। इस कविता संग्रह की कविताएं इसी नई स्त्री को सामने लाती है।

बंगाल की राजनीति में चोट की गणित

बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों के नजदीक आते ही सभी दलों के बीच राजनीतिक चाले गति पकड़ती जा रही हैं। ऐसा मालूम पड़ रहा है कि आरोप-प्रत्यारोप का दौर नया कृतिमान स्थापित करता जा रहा है। पश्चिम बंगाल में इस बार विधानसभा के चुनाव दस चरणों में होंगे। वहीं चुनाव नतीजों के लिए देश को दो मई तक का इंतजार करना होगा। ऐसा बंगाल में पहली बार हो रहा है कि केन्द्र की सत्तारुढ़ दल भाजपा पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरी है। हालांकि भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही अपनी जड़ें जमाना शुरू कर दिया था। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की 40 में से 18 सीटें जीतकर ममता सरकार को भाजपा ने कड़ी चुनौती पेश की थी। इधर, तीन दशकों तक प्रदेश की बागडोर संभालने वाली कांग्रेस और लंबे समय तक सरकार में रहने वाली वामपंथी पार्टी तीसरे नम्बर के लिए जुझ रही है। 

पीएम लगातार कर रहे हैं दौरा

प्रथानमंत्री मोदी सहित भाजपा के सभी बड़े सियासी दिग्गज लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर संघर्ष के दिनों के सभी ममता बनर्जी का साथ छोड़ कर नए समीकरण बनाने में जुटे हुए हैं। कभी साथी थे और कदम से कदम मिलाकर खड़े रहे वही लोग आज ममता बनर्जी  को आखें दिखा रहे हैं। दो मई को चुनाव नतीजों के बाद ही ये सही सही आकलन हो पाएगा कि साथियों ने ममता को कितना नुकसान पहुंचाया। बहरहाल, ये बाद की बातें हैं उससे पहले तो प्रदेश में आरोप- प्रत्यारोप का हिमालय खड़ा हो रहा है। ममता के चोटिल होने के बाद बंगाल की राजनीति ने एक बार फिर करवट बदली और सहानभूति की लहर भाजपा की नाव डूबाने के लिए सुनामी की तरह फैलने लगी। चूंकि सीएम ममता नंदीग्राम में  प्रचार के दौरान किसी ने हमला कर दिया। चूंकि सीएम ममता ने अपने बयान में कहा है। इस घटना के बाद अचानक से भाजपा बैकफूट पर आ गई। पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता एक बार फिर घायल हुई हैं। तृणमूल कांग्रेस आक्रमक हो गई। 

आयोग ने पर्यवेक्षकों से रिपोर्ट मांगा

चुनाव आयोग ने विशेष पर्यवेक्षकों से रिपोर्ट देने को कहा। इसके बाद चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षकों की टीम ने गहन जांच पड़ताल शुरू की। विशेष पर्यवेक्षकों की टीम ने ममता बनर्जी पर किसी भी हमले से इंकार कर दिया। अपनी रिपोर्ट में चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षकों ने कहा कि हमले का कोई रिपोर्ट नहीं मिला। इसके बाद ममता पर विपक्षी पार्टियां एक बार फिर हमलावर हो गई है। भाजपा और कांग्रेस पर सहानुभूति पाने के लिए नौटकीं बताया।

Thursday, March 4, 2021

पटना में इग्नू का क्षेत्रीय केन्द्र

पटना में इग्नू यानी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय का क्षेत्रीय केन्द्र मीठापुर में है। पहले यह गांधी मैदान के पास बिस्कोमान भवन के तृतीय तल्ले पर था अब इसका पता बदल गया है ।बहुत दिनों से पटना में इग्नू स्थाई कैपस की समस्या से जूझ रहा था। अब इस समस्या का निराकरण हो गया है। इग्नू का नया कैंपस व भवन बहुत ही रमणीय है । यह दो मंजिला भवन काफी लंबा- चौड़ा और आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाया गया है। विद्यार्थियों को न्यूनतम परेशानियों का सामना करना पड़े इसका पूरा ध्यान रखा गया है।  

दिव्यांग विद्यार्थियों की सहूलियत के लिए रैम्प का निर्माण कराया गया है। इस रैम्प के निर्माण में ढलान का समुचित ध्यान नहीं रखा गया है जिस कारण से दिव्यांग विद्यार्थियों को चढ़ने - उतरने में काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है । चूंकि ऐसा मैं इसलिए लिख रहा हूं कि मैं एक दिव्यांग हूँ और मेरा यहां एमए का एग्जाम सेंटर था । मैं अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर यह कह रहा हूं। इसके बावजूद शांत और हरे पेड़- पौधे से युक्त परिसर किसी भी आंगतुक का मन- मोहने के लिए पर्याप्त है। अगर यह कहना अतिशयोक्ति न हो तो नया क्षेत्रीय केन्द्र बहुत ही सुंदर व रमणीय है। चन्द्रगुप्त प्रबंधन संस्थान और मौलाना आजाद अरबी- फारसी विवि के पीछे इग्नू का यह क्षेत्रीय केन्द्र अवस्थित है। मुझे आठ फरवरी को परीक्षा देने के उद्देश्य से वहां जाने का मौका मिला। मेरा एमए प्रथम वर्ष का परीक्षा क्षेत्रीय केन्द्र पर ही हुआ। 

इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र, पटना

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय का क्षेत्रीय केन्द्र मीठापुर में है। मीठापुर बस स्टैंड के पास ही है। इस विवि की स्थापना 1985 में हरियाणा के मैदान गढ़ी में की गई है। वर्तमान में इग्नू दूनिया का सबसे बड़ा मुक्त विवि है। बिहार की राजधानी पटना में 1991 से इग्नू का क्षेत्रीय केन्द्र कार्यरत है। क्षेत्रीय केन्द्र राजधानी में होने से विद्यार्थियों  को काफी सहूलियत होती है। इग्नू के सभी 200 से अधिक कोर्स एवं पटना क्षेत्रीय कार्यलय के अंर्तगत 120 से अधिक कोर्स सफलतापूर्वक संचालित विद्यार्थियों की सुविधा के लिए उसके अधिकाधिक वेबसाइट पर उपलब्ध होती है।


एससी-एसटी का मुक्त नामांकन

एससी- एसटी के विद्यार्थी इग्नू विवि में 84 प्रकार के कोर्स में फ्री में नामांकन करा सकते है। ऑनलाइन जाति प्रमाण पत्र अपलोड कर अभ्यर्थी इस सुुविधा का लाभ उठा सकते हैं। फ्री कोर्स संबंधित सूची वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसके पाठ्यक्रम गुणवत्तापूर्ण होते हैं। सोशल वर्क से बीए और एमए यहां से मैंने किया था वह भी प्रथम श्रेणी से पास हुआ। इग्नू नामांकन शुल्क में जो रियायत एससी-एसटी वर्गों के विद्यार्थियों को देती है वह बहुत ही अच्छी व्यवस्था है। यह इन वर्गों के विद्यार्थियों के शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए विश्वविद्यालय द्वारा उठाया गया एक ठोस कदम है। अगर उस दायरे के अंदर दिव्यांग विद्यार्थियों को भी शामिल कर लिया जाता तो पैसे के अभाव में जो दिव्यांग बंधु उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने में सहायता मिलती और उनका भी शैक्षणिक सशक्तिकरण आसानी से हो जाता।


पत्रकारिता 1

पत्रकारिता का जंतर-मं तR प्रेस विज्ञप्तियों का अपना मिजाज होता है अखबार के दफ्तरों में प्रेस ब्रीफिंग, प्रेस कॉन्फ्रेंस, प्रेस विज्ञप्ति बहु...