ये है शाम्भवी विजय है।इनके साथ मेरा यही एक मात्र और दुर्लभ तस्वीर है।भाई समान मित्र @shubham के सौजन्य से यह तश्वीर गर्भगृह से बाहर निकल पाया।इसके लिए शुभम को ढेरो बधाई ।
शाम्भवी आजकल एक पब्लिशिंग हाउस के लिए काम कर रही है।अंग्रेजी साहित्य के प्रति इनका विशेष रुझान है।शाम्भवी अंग्रेजी साहित्य की विदुषी हैं।अंग्रेजी भाषा पर इनकी मजबूत पकड़ इनके प्रतिभा में चार चांद लगाता है।साहित्य के प्रति इनकी अभिरुचि प्रंशसनीय है।शाम्भवी बहुत ज्ञानी हैं। अपनी बातों और विचारों को ढंग से रखती हैं। ये काफी मजबूत और जिंदादिल इंसान हैं।
हमदोनों के बीच विचारधाराओं की लड़ाई कभी नहीं हुई।एक बार की बात है। इन्होंने मुझसे कहा कि मैं क्लास में काफी संजीदा रहता हूं।जबकि हॉस्टल में खूब मस्ती करता हूं।मुझे नहीं मालूम कि किस आधार पर इन्होंने ऐसा कहा था। लेकिन यह मुझ पर लगाया गया एक मिथ्या आरोप था।उसके बाद मैं थोड़ा परेशान सा रहने लगा था।आप उसे मानसिक अवसाद से ग्रसित होना भी बोल सकते हैं । तब इससे उबरने में sunny जो क्लीनिकल मनोविज्ञान की पढ़ाई करता था। उसने काफी मदद की थी।
BHU के शुरुआती दिनों में थोड़ी बहुत दोस्ती थी ।आजकल नहीं है।मुझे मनमुटाव की वजह मालूम नहीं।और कभी पता करने के लिए कोशिश भी नहीं किया।हमदोनों ने एक दूसरे की बातों को कभी नहीं काटा।हमदोनों की बातचीत हमेशा ससम्मान होती थी।कुछ दिनों पहले शुभम ने जब यह तस्वीर ग्रुप में डाले तो पुराने दिनों की तश्वीर आँखों के सामने तैरने लगे।bhu में पहली बार जीवन में हमने एक मित्र को खोया था।आज जब सब अपने अपने क्षेत्रों में उधम मचा रहे हैं। मैं इनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।
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