- हिंदी में कवियत्री अनामिका को मिला यह पुरस्कार
- बीस भाषाओं के लेखकों को किया गया सम्मानित
हिंदी की कवियत्री अनामिका को 2020 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। यह सम्मान अनामिका को उनके काव्य संग्रह टोकरी में दिगंत के लिए वर्ष 2020 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है। अनामिका हिंदी के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाली बिहार की तीसरी साहित्यकार हैं। इसके पहले यह पुरस्कार राष्ट्रकवि दिनकर जी और अरूण कमल को मिल चुका है। कवियत्री अनामिकाजी को साहित्य अकादमी पुरस्कार यह पुरस्कार मिला यह बिहार के लिए गौरव की बात है। इस पुरस्कार मिलने से प्रदेश के साहित्यकारों एवं संस्कृतिकर्मियों में खुशी की लहर है।
कौन है कवियत्री अनामिका
अनामिका दिल्ली विवि के सत्यवती कॉलेज में अंग्रेजी विषय की शिक्षिका हैं। उनका जन्म प्रदेश के मुज्जफरपुर जिले में हुआ है। अनामिका जी के माता-पिता दोनों ही पोफेसर हैं। उनके पिता छायावाद दौर के लोकप्रिय कवि गीतकार एवं पद्मश्री से विभूषित बिहार विवि के कुलपति व विभागाध्यक्ष श्यामनदंन किशोर हैं। उनकी मां डॉ. आशा किशोर भी बिहार विवि में हिंदी विभागाध्यक्ष रहीं। अनामिकाजी के काव्य संग्रह टोकरी में दिगंत में उन्होंने मुज्जफरपुर शहर की स्त्रियां अपने सपनों और विडंबनाओं के साथ कैसे जुझ रही हैं, को दिखाया है। कैसे मुज्जपरपुर शहर में आज की स्त्री के सामने स्थितियां अधिक जटिल हैं। उन्हें नट की तरह एक साथ कई रस्सियों को साधना होता है। आज की स्त्री का भावलोक घर से बाहर तक विस्तृत हैं। नई चुनौतियों को वे समरसता से साध रही हैं। इस कविता संग्रह की कविताएं इसी नई स्त्री को सामने लाती है।
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