Monday, August 17, 2020

और कितनी निर्भया.....

जब  देश ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दिया था...तब किसी ने सोच भी नहीं होगा कि ....इस देश में बचेंगी बेटियां तभी तो पढ़ेंगी बेटियां...
लेकिन हम उनकी आवाज़ बनने के अलावे... कर भी क्या सकते हैं.....पुकारे भी तो किसे पुकारे..... यह देश तो द्रोपदी और अहल्या का भी उतना ही था..... जितना कि हमारा और आपका.....
क्या हुआ था अहल्या के साथ.....आखिर क्या दोष था द्रुपद कन्या का..... कुछ याद है आपको.....या भुला दिए उसे .....
मैं उसी अहल्या की बात कर रहा हूं..... जिसका उद्धार राम ने किया था.....एक मर्द (इंद्र ने)ने उसके साथ छल किया और दूसरे मर्द (उसके पति गौतम ऋषि) ने उसे दंड दिया था...
द्रोपदी के साथ क्या हुआ था...उसने तो विरोध किया था...पुरजोर विरोध किया था...वह सभा में ख़ूब चीखी और चिल्लाई भी थी.....उस सभा में सभी तो थे.....सबके सब अपने ही थे...कोई पिता का मित्र था... तो किसी की वह पुत्रवधू  थी ... किसी की पत्नी....
महाबली भीष्म.... आचार्य द्रोण....कृपाचार्य... वहीं पर आपने हाथों को बांधे खड़े थे .....द्रुपद कन्या के पांचों पति......न्यायप्रिय युधिष्ठिर..... परम् बलशाली भीम... सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन.....तेजश्वी नकुल और सहदेव...
जब सभासदों ने द्रौपदी की चीख...पुकार को अनसुनी कर दिया ....फिर आज हम किसी से कैसे उम्मीद कर सकते हैं  ....कि वह नारी सम्मान में एक बार फ़िर से धर्मक्षेत्र में शंखनाद करेगा....
हम जागने के लिये अपनी बारी आने का इंतज़ार जो कर रहे हैं...विड़बना तो दिखिये.....अगर कोई किसान पराली जलाये तो तुरंत एफआईआर..... और साथ ही साथ सरकारी अनुदाननों से तीन साल तक वंचित होने का उपहार अलग से मिलता है...
तो साहब जरा ये भी लगे हाथ बता दीजिए ....जब कोई बेटी जलाये तब....समय से न्याय क्यूं नहीं मिलता...न्याय के लिये क्यूं पड़ता है भटकना...
अगर अपराध जघन्य है तो सजा भी कठोर मिलनी चाहिए.....इंडोनेशिया में बलात्कारी को नपुंसक बना दिया जाता है..... जीवन भर वह महसूस करे कि दर्द का अनुभव कैसा होता है..... इसलिये उसके अंदर महिलाओं के हार्मोन डाले जाते हैं...
और हम न्याय के लिए जंग लड़ते रहते हैं।
और इंतजार करते हैं अगली बार फिर कहां..... घटनाएं रोज हो रही है.... बस सुर्खियां नहीं बन पाती....
दुनिया बदलने से बेहतर है ....हम अपने नजरिए में बदलाव करें...फिर कोई अहल्या... कोई द्रोपदी... कोई निर्भया किसी दम्भी मर्द का शिकार न बन सके.....
अब गोविंद बचाने नहीं आएंगे .....
दुर्गा और चंडी का रूप धारण करना ही होगा
तुझे अपनी लड़ाई खुद ही लड़ना होगा। 

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