अविनाश। आज बुद्ध पूर्णिमा है। भगवान बुद्ध ने अपना प्रकाश स्वयं बनने की सीख दी है।इस दिन का विशेष महत्व है।यह दिन स्वयं को टटोलने का अवसर देता है।यह सीख देता है कि कैसे उद्दात भाव और शांत चित्त मन से अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
मैं आज अपने पोस्ट में एक ऐसे लड़के का उल्लेख कर रहा हूं जिसकी तश्वीर देखकर ही आपको मालूम हो जाएगा कि वह कितना शांतचित्त भाव का है।उसके लिए राष्ट्र प्रथम है और जिसे अपने हिन्दू होने पर गर्व है। आध्यात्मिक ज्ञान और चेतना के लिए जो श्री श्री रविशंकर से प्रेरणा लेता है।वह श्री श्री का एक कट्टर समर्थक है।
निःसंदेह दिखने में वह बंगालियों जैसा लगता है ।लेकिन वह विशुद्ध बिहारी है।नई नई भाषाओं को तेजी से सीखने की कला में उसे महारत हासिल है।अपने इन्हीं गुण के कारण बंगाल के नवोदित हिंदी के पत्रकार के बीच उसकी गहरी पैठ है।
कोलकाता से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले उस स्वयंभू गुरु का नाम उज्ज्वल है। हॉस्टल में कुछ लड़के गुरुजी के नाम से भी इसे पुकारते थे।कोलकाता में अपने अल्पकालिक प्रवास के दौरान इसने बड़ी तेजी से बंगाल भाषा सीखकर बंगालियों को खूब झकया।
स्वभावगत यायावर प्रवृत्ति का होने से एक स्थान पर यह बंधकर नहीं रहता । बिहार, रांची, कोलकाता ,बनारस होते हुए आजकल यह राष्ट्रीय राजधानी में विचर रहा है।
बंगालियों में एकता की जड़ें काफी मजबूत होती है।इसलिए शायद वहीं पर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की बीज अंकुरित हुई थी।ये लड़का इसका बहुत बड़ा उदाहरण है।पूरे सत्र के दौरान जिस बाला को केंद्र बना कर पूरा कैंपस घूम रहा था। अगर गणितीय भाषा में कहें तो जो लड़की अपने धुरी पर मनचले लड़कों को घुमा रही थी। उसे देखते हुए इसने कहा कि यह बंगाली है।होली के मौके पर जब दोनों का आमना सामना हुआ तो उज्ज्वल सच साबित हुआ।वह बंगाली ही थी। और उज्ज्वल उसके स्कूल का ही लड़का निकला।
समय का कुचक्र दिखिये । पटरियां बिछनी शुरू ही हुई थी कि गाड़ी डिरेल हो गई।उज्ज्वल इंटर्नशिप करने के लिए दिल्ली चला गया।उसके बाद गाड़ी कोई और हांक कर ले गया।लेकिन इतेफाक से दोनों एक बार फिर कोलकाता में मिले।बेचारे ये अकेले और वो किसी के संग थी।
नोट:- बहुत कम लोगों को पता है कि यह दोहरे चरित्र का व्यक्ति है।इस बात को अन्यथा नहीं लीजिएगा।मेरे कहने का आशय यह है कि क्लास में जब कुछ सीखने या बोलने की बारी होती थी तब यह बहुत ही संजीदा होकर बोलता और सुनता था वहीं जब दोस्तों की झुंड में होता तब मस्तीखोर बन जाता था। दोस्तों के साथ अश्लील बातें करता और अश्लीलता से भरे हुए हरकतें करता था।समझिए कि मस्ती करने के मामले में बेजोड़ इंसान है।मेरी कुछ तश्वीर इसके पास है जिसे आधार बना कर ये मुझे डराता रहता है।इस बात पर बहुत ही गौरान्वित महसूस करता है। और गर्व से कहता है कि हरेक इंसान को दोहरे चरित्र का होना चाहिए।जब कुछ सीखना हो तब संजीदा और जब दोस्तों के साथ रहे तब मस्ती। इसलिए कभी कभी हमलोग इसे मस्तीखोर भी कहते थे।

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