अविनाश मिश्रा। ये हैं सर्वेश । इनका पूरा नाम सर्वेश कुमार गोंड हैं।
BHU के दक्षिणी परिसर में पढ़ने वाले लड़के और सिर्फ लड़के इनसे भलीभांति परिचित होंगे।हालांकि लड़कियों के इलाके में मशहूर होने के लिए ये कॉमन जिम सेंटर लगातार जाते रहे हैं लेकिन आगे का पता नहीं।हमारे महाराज जी के लड़के हैं।आज इनकी शादी हो रही है ।लॉकडाउन के कारण दिन में ही बनारस के पास इनकी शादी हो रही है। जब मैं यह पोस्ट लिखा रहा था उसी समय में ये विवाह सम्बंधी वैदिक कार्यक्रम सम्पन्न करने में लगे हुए हैं। सर्वेश और इसके सभी भाई मेहनतकश इंसान है।
इनके जीवन में एक समय ऐसा भी था जब ये घोर आर्थिक संकटों से जूझ रहे थे। इससे उबरने के लिए ये गाँव से अपने पिता के पास BHU के दक्षिणी परिसर आ गए। इनके पिताजी जिन्हें हमलोग महाराज जी बोलकर पुकारते थे, वो बहुत ही नेक दिल इंसान थे।लेकिन आज वो हमलोगों के बीच नहीं हैं ।पिछले वर्ष अर्थात 2019 मार्च में उनका देहांत हो गया। वो लंबे समय से बीमार चल रहे थे।जब हमलोग वहां पढ़ रहे थे तभी हॉस्टल के मेस में उनका आना- जाना कम होने लगा था।लेकिन जब भी मिलते एक अभिभावक की तरह मिलते। उनका सीधा प्रश्न होता...कैसे है भइया। अमूमन जैसा BHU की परंपरा है। वहां कार्यरत एक चतुर्थवर्गीय कर्मी से विभागाध्यक्ष तक सभी #महामना के सपनों को आकार देने में लगे रहते हैं।महाराज की भूमिका व योगदान महती थी।
महाराज जी शास्त्र और शास्त्रीयता से बिल्कुल अनभिज्ञ थे। लेकिन चेहरा पढ़ने की कला में उनके बराबरी का वहां कोई दूसरा नहीं था। महीनों बिना पैसे के खिलाते। मुझसे कभी पैसा नहीं मांगा। लेकिन घर से जैसे ही पैसा आता उन्हें पहले मैं दे देता। हरेक बच्चे का पूरा ध्यान रखते। जो बच्चा खाना खाने नहीं आता तो उसके रूम में खाने के बारे में जाकर पूछते।ऐसे नेक पिता के पुत्र हैं सर्वेश। आज ये भी सभी भाइयों के साथ मिलकर मेस चला रहे हैं। जब भी कोई घूमने जाता है तो आज भी उन्हीं के मेस में खाना खाता है। और सर्वेश कभी पैसे नहीं मांगता।सर्वेश और हमारा आत्मीयतापूर्ण सम्बंध था। जो आज भी चला आ रहा है।आज इसकी शादी है। इसे आप सब अपना शुभाशीष दीजिए।
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