अविनाश मिश्रा । 30 मई 2019 के दिन शाम के तीन बज रहे थे और मोदी के दूसरे कार्यकाल का शपथ समारोह टीवी पर प्रसारित हो रहा था । वहीं दूसरी तरफ हिंदुस्तान , पटना के लिए मेरा टेस्ट लिया जा रहा था।
- मेरे मन के अंदर तमाम तरह की दुविधाएं आकर ले रहीं थी । एक के बाद एक असफलताओं का स्वाद चखने के बाद मन की गति मैराथन की रफ्तार से दौड़ रही थी। मैं काफी डरा व सहमा हुआ सा था।
- मेर अंदर साहस व आत्मविश्वास भरने के लिए शशिकांत द्विवेदी सर का बहुत बहुत आभार। सर आप मुझे अपने पास मुजफ्फरपुर हीं बुला रहे थे। लेकिन मैं वहां रहने में असमर्थ था। मैं एक धुरी से बंधा हुआ हूं। मेरी परिधि निश्चित है। मैं उस परिधि के बाहर जाने की कभी सोच भी नहीं सकता। फिर भी आप अपना प्यार मार्गदर्शन बनाएं रखियेगा।
- मुजफ्फरपुर जाने की असमर्थता एक बार फिर मुझे पटना खिंच ले आई। इस बार शशिकांत सर के निर्देश में आगे बढ़ रहा था। मेरे लिए उन्होंने नींव तैयार करने का काम किया। इनके परामर्शानुसार ही पटना में दीपक दक्ष सर से मिला। शायद उस दिन दीपक सर के पास समय की किल्लत थी। इसलिए वो ज्यादा समय मुझे नहीं दे पाएं। सिर्फ अपना नंबर दिए और बोले कि फोन करना। इसके बाद मैं घर लौट आया।
- लगभग अप्रैल महीने के मध्य में हिंदुस्तान का स्मार्ट लंच होने वाला था। सभी लोग उसी में व्यस्त थे।इस नई शुरुआत के लिए लोगों के मन में गजब का उत्साह देखने को मिला। ऑफिस में मिलने पर दीपक सर एक नम्बर दिए और बोले कि ये रविन्द्र वर्मा का नंबर है।इनसे बात करके मिल लीजिए।संकोची मन से मैंने उनसे पूछा कि इन्हें कैसे पहचानेंगे।इस प्रश्न के जवाब में उन्होंने बिल्कुल छोटा सा उत्तर दिया। उनको सब जानता है।इसके आगे वो कुछ नहीं बोले।मैंने भी निःशब्दता का आर ले लिया ।इसके बाद दीपक सर मुझे नीचे से पटना लाइव के कार्यालय तक लेकर गए।
- इसके बाद जीवन में आया असली मोड़।यहां मुलाकात हुई सदाबहार व्यक्तित्व के धनी इंसान रविन्द्र वर्मा से।
उनके अभिवादन में मैंने उन्हें - भइया नमस्ते बोला (आज भी मैं मिलने पर यही बोलता हूँ )।
इसके जवाब में उन्होंने बोला- नमस्ते (आज भी वो यही बोलते हैं ) । इसके बाद शुरू हुआ सीखने का दौर।
- पिछले एक साल से रविन्द्र भइया को जानता हूं। उनका प्रभाव मेरे जीवन पर गहरा पड़ा है । आज वो मेरे जीवन में मित्र...गुरु...और मार्गदर्शक का स्थान रखते हैं।जितना प्यार व स्नेह उनसे मिलता है मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि अगर मेरा सहोदर बड़ा भाई होता तो नहीं मिलता।
-इसके बाद मिला शंकर जी से। शंकर अर्थात सबका कल्याण करने वाला। अपने नाम के अनुरूप ही कर्म करने वाले इस युवा पत्रकार से बहुत प्रभावित हूँ।किसी भी परिस्थिति के लिए हमेशा तैयार रहने वाला यह इंसान मुझे अपना मित्र और भाई मानता है।यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है।इसके लिए मैं उनका आभार व्यक्त करता हूँ ।इनके पास हाजमोला का भंडार है। सर्वथा सबके लिए सुलभ व उपलब्ध।
- वहां कार्यरत सभी से कुछ न कुछ सीखने को मिला। सबने अपने हिस्से का ज्ञान व मार्गदर्शन मुझे दिया।सबका बहुत बहुत आभार।
- 1 जून 2019 को हिंदुस्तान प्रादेशिक टीम का हिस्सा बना। लगभग एक सप्ताह तक वहां जाता बैठता और काम करते हुए देखता और सीखता रहा।
-मुझे पहला मौका सीवान एडिशन में तत्कालीन संपादक सर के कहने पर मिला। पहला पेज सीवान का पाँच नम्बर मिला। इस एडिशन की प्रभारी आरती जी थीं। क्लास रूम पत्रकारिता में जो सिखाया गया था उसी के अनुरूप उनका व्यक्तित्व निडर व निर्भीक है। विरले लोग होते हैं जिनके अंदर सच बोलने का साहस होता है।मैं पूरे विश्वास के साथ बोल सकता हूं कि सच बोलने के पैमाने पर ये हमेशा खड़ी उतरती हैं।
- एक समय की बात है। मैं बिल्कुल नौसिखिया था। धीरे धीरे काम करता था। एक प्रभारी महोदय इसकी शिकायत कर दिए। लेकिन हिंदुस्तान के प्रादेशिक टीम में सिर्फ आरती जी पूरे आत्मविश्वास के साथ मेरे पक्ष में बोलीं। इनके साहसिकता के अनुभव ने मुझे बेहद प्रभावित किया।
- वैसे तो वहां काम करते हुए मुझे एक साल गए। मुझे सबसे कुछ न कुछ सीखने को मिला है। मैं सबका बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूं।विशेषकर हमारे इंचार्ज सुनील सर , सतेंद्र सर,शैलेंद्र भइया, दिलीप भइया, अजय भइया, विजय सर, नवल सर,अनिल भइया, मिंटू सर, रितेश भइया, राजू सर,प्रह्लाद सर, नितेश भइया, मनीष जी, अंजली जी, अश्मनी , सविता मैम और हमारे जुनैद सर....आप सबका बहुत बहुत आभार।आलोक भइया से बहुत कुछ सीखा और सिख भी रहा हूं।एक इंसान हरपल कैसे आनन्दित रह सकता है इसे इनसे बेहतर कोई और नहीं सीखा सकता।
- मुझे झेलने के लिए हिंदुस्तान पटना के टीम का बहुत बहुत धन्यवाद। 1 जून 2020 को हिंदुस्तान पटना के प्रादेशिक टीम का हिस्सा बने एक साल बीत गए।अब तक का सफर अच्छा रहा।आपलोगों का प्यार, स्नेह और मार्गदर्शन मिलता रहे ....बस यही शुभेच्छा है।आप सबको ढेरों बधाई व अभिनंदन एक बेहतरीन साल देने के लिए।
मुझे मौका देने के लिए सबका बहुत बहुत आभार व धन्यवाद।
आपका अविनाश मिश्रा
रहे न रहे हम
महका करेंगे
बनके कली बनके हवा...
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