Thursday, July 23, 2020

जादूगर से उलझ बैठे सचिन पायलट

  • अपनी सूझबझ से बड़े-बड़े धुरंधरों को पटखनी देने वाले सियासी जादूगर हैं गहलोत
  •  हर सचिन खिलाड़ी नहीं होता औऱ हर पायलट उड़ान नहीं भर सकता

राजनीति के गलियारे सें सियासी उठापटक होना कोई नई बात नहीं है।लेकिन राजस्थान के राजनैतिक गलियारे में दो छत्रपों के बीच पिछले कुछ महीनों से जो महासंग्राम चल रहा है वह अपने तरह का एक असाधारण परिघटना भी नहीं है । और ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हो रहा है। बीते सत्तर सालों के इतिहास में कई बार जोड़-तोड़ के राजनैतिक समीकरण बनाने में सिपहसलारों ने अपनी कुशलता का परिचय दिया और अपने सियासी परचम को बुलंद किया ।पायलट और गहलोत की राजनैतिक लड़ाई भी इससे अलग नहीं है ।दोनों राजनीति के धुरंधर हैं ।यह दो पीढ़ियों के बीच की लड़ाई भी नहीं है । यह महत्वकांक्षा और अति महत्वकांक्षा के बीच का द्वंद है। गहलोत राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं । उनको जानने वाले उन्हें जादूगर कहते हैं। वह सर्कस , मेले या गांव- शहर के किसी चौराहे पर अपनी कलात्मकता से दर्शकों को चौंधिआने वाले जादूगर नहीं हैं । बल्कि सियासत में नाजूक मौके पर अपनी सूझबझ से बड़े-बड़े धुरंधरों को पटखनी देने वाले सियासी जादूगर हैं ।

गहलोत ने एक समय  कहा था कि हर गलती की एक कीमत होती है । गहलोत का नाम उन नेताओं में शामिल है जो अपने विरोधियों की गलतियों को आसानी से भूलते नहीं है । इसके बदले में पूरी कीमत वसूलते हैं। सीपी जोशी और मदेरणा वाले प्रकरण को कौन भूल सकता है । इनको गहलोत ने बड़े जतन से अपने सियासी राजपथ से किनारा किया ।
अभी ताजा उदाहरण ही लीजिए पायलट प्रकरण पर उनका एक बयान आया था-जब उन्होंने जयपुर में पायलट को खूब खड़ी-खोटी सुनाया । पायलट को निकम्मा और नकारा तक कहा । उन्हें काम नहीं करने वाला नेता बताया । गहलोत ने यहां कहा कि मैं बैंगन बेचने नहीं आया हूं । कोई सब्जी बेचने नहीं आया हूं । मैं मुख्यमंत्री बन करके आया हूं । गहलोत के मजबूत आत्मविश्बास को झलकाने वाले इन बयानों को हल्के में लेने की भूल किसी को नहीं करनी चाहिए । ऐसे बयान किसी भी पाशा को पलटने के लिए काफी हैं। इस बयान के पीछे इनके राजनैतिक सूझबूझ की झलक दिख रही है ।उनका मजबूत आत्मविश्वाश झलक रहा है । गहलोत आसानी से हार मानने वाले नेता नहीं है । शांत समुंद्र अपने साथ बड़ी तबाही लेकर आता है ।
वहीं दूसरी तरफ, पायलट राजनीति के उभरते हुए खिलाड़ी हैं । केन्द्र और संगठन के कई पदों को सुशोभित कर चूके हैं । उन्होंने इस बार राजस्थान में कांग्रेस सरकार की वापसी कराने में अग्रणी भूमिका  निभाई है ।लेकिन राजस्थान में उनका सियासी विमान उड़ान नहीं भर सका ।गहलोत की जादूगरी पायलट की कुशलता पर भारी पड़ी । 200 सीटों वाले राजस्थान केो सियासी विमान को युवाजोश के साथ उड़ान नहीं भर सके तो विमान हाईजैक करने की पटकथा ही लिख डाली ।अब देखना यह  दिलचस्प होगा कि पायलट अपनी पटकथा पूरी कर पाते हैं या गहलोत उनके अरमानों पर पानी फेर देते हैं ।अगर पायलट उड़ान भरने में असफल रहे तो  यह हास्यास्पद विषय नहीं होगा । चूंकि  ये सिर्फ नाम वाले पायलट हैं और क्रिकेट के मैदान पर विपक्षी गेंदबाजों की बखियां उधेरने वाले सचिन भी नहीं हैं । ये तो दो तव्वों के संयोग से बनने वाले एक मिश्रण हैं । राजस्थान वर्षों से महत्वकाक्षांओं की पीच तैयार करने वाला सियासी अखाड़ा रहा है । कालांतर में इस लड़ाई के परिणामों का मुल्यांकन किया जाएगा । 
 

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