क्या है काला धान
सामान्यतौर पर आम चावल की तरह ही काला चावल होता है लेकिन इसका रंग काला होता है । विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका चावल कैंसर व मधुमेह से पीडितों के लिए बहुत ही लाभप्रद है । उनका मानना है कि यह चावल चर्बी कम करने के साथ पाचन शक्ति बढाने में भी बहुत लाभकारी है । इसकी खेती चीन में बड़े पैमाले पर की जाती है जबकि भारत में इसकी खेती पूवोत्तर के राज्य मणिपुर और असम में की जाती है । अब भारत के कई राज्यों में काले धान की खेती होने लगी है। धीरे- धीरे काले धान की खेती भारत में बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
पारंपरिक से कुछ अधिक होती है पौधे की लंबाई
काले धान के पौधे की लंबाई कुछ अधिक होती है। पारंपरिक धान के पौध की लंबाई साढ़े तीन से चार पुट होती है जबकि काले धान के पौध की लंबाई चार फुट से साढ़े चार फुट तक होती है । इस धान के खेती के लिए अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होता है ।यह कम पानी में भी आसानी से हो जाता है ।साथ ही तैयार होने में भी अधिक समय नहीं लगता है । अमूमन यह 120 दिनों में तैयार हो जाता है ।
सेहत और कमाई दोनों साथ- साथ
पारंपरिक धान के मुकाबले इससे अधिक कमाई होती है। कई राज्यों की सरकार इसकी खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित भी कर रही है । जैविक तरीके से इसकी खेती की जाए तो किसानों को मोटी कमाई होती है । पांरपरिक चावल 20 से 80 रूपये तक बिकते हैं वहीं इसके चावल की कीमत 250 रुपये तक होती है । साथ ही जैविक तरीके से ऊपजाएं गए काले धान के चावल की कीमत 500 रुपये तक होती है ।
विटामिन व एंटी ऑक्सीडेंट का खजाना
काले धान के चावल में विटामिन बी, ई के साथ कैल्शियम , मैग्नीशियम , आयरन तथा जिंक आदि प्रचुर मात्रा में मिलते हैॆ । ये सारे हमारे शरीर में एंटी ऑक्सीडे़ट का काम करते हैं । इसके सेवन से खून भी साफ होता है ।
इसके खेती में रासायनिक खाद का प्रयोग न होने से इस धान के चावल में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है ।
ऑनलाइन बीज है उपलब्ध
कई ई कॉमर्स कंपनियां बीज उपलब्ध करा रही हैं । भारत में काले धान की खेती सर्वप्रथम मणिपुर में शुरू हुई । पूवोत्तर राज्यों के किसान से ई-कॉमर्स वाली कंपनियां बीज खरीद कर अपने माध्यम से बेच रही है ।
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