Sunday, July 26, 2020

बाबा भुइंया मंदिर - जहां बहती है दूध की नदी

  • वैशाली जिले में है एक ऐसा मंदिर जहां बहती है दूध की नदी 
  • मंदिर के गर्भगृह  में विराजमान हैं  बाबा बसावन, बाबा बख्तौर और माता गहिल 
हाजीपुर प्रखंड के पानापुर लंगा पंचायत में पशुपालकों के देवता बाबा भुंइया का मंदिर है।यह मंदिर बहुत ही विशाल और रमणीय है। हजारों भक्त इस मंदिर में सोमवार और शुक्रवार को दुग्धाभिषेक करते हैं । यह मंदिर वैशाली तथा इसके आसपास के जिलों में पशुपालन से जुड़े किसानों के बीच आस्था का बहुत बड़ा केन्द्र है। इस क्षेत्र के छोटे-बड़े सभी पशुपालकों के यहां जब कोई गाय- भैंस बच्चा देती है तो उसका दूध भुइंया बाबा को अर्पित किया जाता है ।इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था है । इस क्षेत्र में बाबा भुइंआ की मान्यता लोक देवता के रुप में है । बाबा भुइंआ मंदिर के गर्भगृह में  बाबा बसावन, बाबा बख्तौर और माता गहिल विराजमान हैं । लोगों का ऐसा विश्वास है कि इस मंदिर में दुग्धाभिषेक करने से पशुओं को कोई बीमारी नहीं होती है । साथ ही पशुओं की उम्र लंबी होती है ।

कौन थे भुइंया बाबा

बाबा भुइंया के भक्त देसी वाद्ययंत्र मानर पर गीत गाते हुए मंदिर में प्रवेश कर दुग्धाभिषेक करते हैं । गीत में बाबा भुइंया के बहादुरी के किस्से को गाए जाते है । इन गीतों में बाबा बसावन , बाबा बख्तौर और माता गहिल का उल्लेख होता है।गीतों से ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि उन्होंने अपने पशुओं की रक्षा करने के लिए बड़ी लड़ाईयां लड़ी । इन गीतों में उनकी बहादुरी का बखान होता है। यदुवंश शिरोमणि बाबा बसावन और बाबा बख्तौर इन गीतों में कहा गया है ।

वसंत पंचमी और दशहरा पर मेला

वैसे तो सालों भर इस मंदिर परिसर तथा इसके आसपास मेले जैसा माहौल होता है।लेकिन साल में दो बार वंसत पंचमी और दशहरा के मौके पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है । यह मेला दो महीने तक लगता है।लकड़ियों और कृषि औजारों के लिए यह मेला बहुत ही लोकप्रिय है। खरीदारी करने के लिए लोग दूर दूर से आते हैं।

कैसे पहंचे बाबा भुइंआ

सड़क और रेलमार्ग से बाबा भुंइया मंदिर स्थान बहुत ही आसानी से पहंचा जा सकता है। जिला मुख्यालय से बाबा भुइंया मंदिर की दूरी लगभग 12 किलोमीटर के आसपास है । हाजीपुर-ताजपुर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित बिदुपुर से उत्तर दिशा की ओर जानेवाली राजापाकड़ सड़क से भी जाया जा सकता है । इसके साथ हाजीपुर- महुआ राजकीय मार्ग पर स्थित सेन्दुआरी चौक से मंदिर आसानी से पहंचा जा सकता है । श्रद्धालु रेलमार्ग से भी बाबा भुइंया मंदिर आते हैं । बाबा भुइंया मंदिर से निकटस्थ रेलवे स्टेशन अक्षयवट राय स्टेशन है ।अक्षयवट राय स्टेशन से मंदिर की दूरी आठ किलोमीटर के करीब है। स्टेशन परिसर से ही  श्रद्धालु ऑटो से मंदिर आ सकते हैं ।
                        बाबा भुइंया मंदिर

बाबा बसावन ट्रस्ट करता है मंदिर का प्रबंधन 

बाबा भुइंया मंदिर की देखरेख बाबा बसावन ट्रस्ट करता है।इसके प्रबंधन के लिए इस बाबा बसावन ट्रस्ट का गठन किया गया है। जिस दूध से पशुपालक भाई मंदिर के गर्भगृह में विराजमान वावा बसावन, बाबा बख्तौर और माता गहिल का दुग्धाभिषेक करते हैं उसे मामूली दर पर लोग प्रसाद के रुप में खरीदते हैं । इससे जो आमदनी होती है उसे जनकल्याण के कामों में खर्च किया जाता है ।

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