- समुद्र मंथन के समय प्रकट हुआ था पारिजात का पौध, चौदह रत्नों में से एक था यह पौध
- श्रीकृष्ण ने इंद्र को युद्ध में पराजित कर पारिजात के दैवीय पौध लाए थे पृथ्वीलोक पर
5 अगस्त को पीएम मोदी एक दिवसीय दौरे पर अयोध्या गए थे। पीएम का अयोध्या दौरा बेहद खास था। इस दौरान लगातार मीडिया अयोध्या में उनके कार्यक्रम को कवर कर रहा था। सबसे पहले पीएम हनुमानकोट गए और वहां हनुमानजी की पूजा-अर्चना की। इसके बाद भगवान राम के मंदिर की आधारशिला रखने के लिए भूमि पूजन किए। इस अवसर पर भूमि पूजन करने से पहले राममंदिर परिसर में प्रधानमंत्री ने पारिजात का पौध लगाया। ये कोई सामान्य पौध नहीं है। यह दैवीय पौधा है जो समुद्र मंथन से प्रकट हुआ था। इस पर छोटे-छोटे आकार के सफेद फूल खिलते हैं। पारिजात के फूल अन्य फूलों से अलग होते हैं। ये फूल रात में खिलते हैं और सुबह झड़कर नीचे गिर जोते हैं।
धन की देवी लक्ष्मी को बेहद प्रिये हैं पारिजात के फूल
पारिजात के फूल के बारे में हिंदू धर्म में कई तरह की मान्यताएं हैं। ऐसी मान्यता है कि पारिजात के फूल देवी लक्ष्मी को अर्पित करने पर वो बेहद प्रसन्न होती है। पौध से तोड़कर पारिजात के फूल को नहीं चढ़ाया जाता है। पूजा के लिए उन्हीं फूलों का उपयोग किया जाता है जो झड़कर नीचे गिर जाते हैं। शास्त्रों में पारिजात के फूलों को पेड़ से तोड़ना वर्जित किया गया है।
पारिजात के पौधे के बारे में पौराणिक कथा
धर्म ग्रंथों के अनुसार एक बार महर्षि दुर्वासा के श्राप के कारण स्वर्गलोक श्रीहीन हो गया था। इससे सारे देवता शक्तिहीन हो गए थे। स्वर्गलोक भी उनसे छीन गया था। राक्षसों से जान बचाने के लिए छुपे रहते थे। नारदजी के सलाह पर देवराज इन्द्र सहित सारे देवतागण श्रीहरि की शरण में गए। इस कष्ट के निवारण का उपाय सुझाने का अनुरोध देवताओं ने भगवान विष्णु से किया। भगवान विष्णु ने देवताओं से असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने की सलाह दिेया । और कहा कि समुद्र मंथन से ्अमृत की प्राप्ति होगी, जिसे पीकर सब अमर हो जाएंगे। समुद्र मंथन से चौदह रत्न प्राप्त हुए। समुद्र मंथन के दौरान पारिजात पौधा भी प्रकट हुआ जिसे देवराज इन्द्र ने स्वर्गलोक में स्थापित किया। स्वर्गलोक में इसे छूने का अधिकार सिर्फ उर्वशी नामक अप्सरा को प्राप्त था। पारिजात के पौधे को छूने के बाद उर्वशी की सारी थकान दूर हो जाती थी।
इन्द्र को युद्ध में पराजित कर श्रीकृष्ण लाए थे पारिजात के पौधे को पृथ्वीलोक पर
धर्म ग्रंथों में पारिजात के पौधे के संबंध में अलग अलग कहानियां है। मान्यता है कि एक बार माता पार्वती ने महादेव से पारिजात के पौध आपने वाटिका में लगाने की इच्छा व्यक्त की। इसके बाद पारिजात के पौधे देने का आग्रह महादेव ने इंद्र से किया।लेकिन अपने मद में चूर देवराज इंद्र ने महादेव को पारिजात का पौध देने से यह कहते हुए माना कर दिया कि ये स्वर्गलोक की धरोहर है।इससे देवताओं को वैभव, ऐश्वर्य आदि प्राप्त होते हैं। महादेव ने फिर स्वयं पारिजात के पौधे को प्रकट किया। हरिवंशपुराण के अनुसार एक समय द्वापर युग में नारदजी श्रीकृष्ण से मिलने पृथ्वीलोक आए। उस समय नारदजी के हाथों में पारिजात के फूल थे। नारदजी ने फूल श्रीकृष्ण को भेंट किए। श्रीकृष्ण ने उस फूल को रूक्मणी को दे दिए। जब ये बात श्रीकृष्ण की एक और पत्नी सत्यभामा को ज्ञात हुई तो वो क्रोधित हो उठी। सत्यभामा ने अपनी वाटिका के लिए श्रीकृष्ण से पारिजात के पौध की मांग की । श्रीकृष्ण के समझाने पर भी सत्यभामा ने अपना हठ नहीं छोड़ा। सत्यभामा हठ के सामने झूकते हुए श्रीकृष्ण ने अपने एक दूत को स्वर्गलोक में पारिजात के पौध लाने के लिए भेजा। देवराज इन्द्र ने पौध देने से इंकार कर दिया । श्रीकृष्ण के दूत को इन्द्र ने खाली हाथ वापस भेज दिया। श्रीकृष्ण को इससे बहुत ही रोष हुआ। पारिजात के पौध के लिए श्रीकृष्ण ने इंद्र पर आक्रमण कर दिया। युद्ध में श्रीकृष्ण की जीत हुई। श्रीकृष्ण ने इंद्र को पराजित कर पारिजात के पौध को ले आए। श्रीकृष्ण ने पारिजात के पौध को सत्यभामा की वाटिका में लगवा दिया। सत्यभामा को सबक सिखाने के लिए श्रीकृष्ण ने कुछ ऐसा किया कि सत्यभामा की वाटिका में पारिजात के फूल लगते और रूक्मणी की वाटिका में गिरते । आज भी पारिजात के फूल पेड़ से दूर जाकर गिरते हैं।
औषधीय गुणों का भंड़ार है पारिजात के पौधे
पारिजात के पौधे औषधीय गुणों का भंडार है। आयुर्वेद में पारिजात के पौधे से जटिल और असाथ्य रोगों के निदान का वर्ण़न किया गया है। पारिजात बावासीर के लिए रामबाण औषधि है। पारिजात के एक बीज का प्रतिदिन सेवन करने से बावासीर ठीक हो जाता है। ऐसा दावा किया जाता है। पारिजाक के फूल ह्रदय रोग के निदान के लिए उत्तम माने जाते हैं। इसके पत्तियों को पीसकर शहद के साथ सेवन करने से सुखी खांसी ठीक हो जाती है। साथ ही त्वचा पर लगाने से त्वचा संबंधी रोग ठीक हो जाते हैं। गुर्दे के रोग में पौध बहुत लाभकारी है।
Bahut khub
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