केदारनाथ सिंह जी कहते हैं," जाना हिंदी की सबसे खौफनाक क्रिया है।"
जब हम एक स्थान से दूसरे स्थान जाते हैं तो हमारा एक परिवार, जिनके साथ हमने जीवन का एक लंबा कालखंड बिताया है , उसे छोड़ना होता है। साथ ही एक ऐसे परिवार में आपका स्वागत किया जाता है, जो बिल्कुल ही अपरिचित होता है । वहां जानने वाला कोई नहीं होता है। उस नए परिवार में अगर कुछ साथ रहता है तो वह है आपका काम और आपके वे साथी जो हमेशा चट्टान बनके आपके पीछे खड़े रहते हैं। किसी का साथ छोड़ना हमेशा दुःखद होता है। लेकिन आपका साथी हीं सारथी बन जाए तो आप किसी भी दुविधा को बहुत ही आसानी से पार पा जाते हैं। पिछले महीने के 15 तारीख को मैंने " हिंदुस्तान" छोड़ दिया। लेकिन हिंदुस्तान ने जो संस्कार दिए , जो सिखाया वह मेरे लिए अमूल्य है। वहां कार्यरत सभी लोगों से सीखने का मौका मिला। सबका साथ मिला। सबका प्यार मिला। सबसे सम्मान मिला।
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