इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी की जगह 15 जनवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। शास्त्र में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा गया है। ज्योतिष ने बताया कि इस बार मकर संक्रांति के दिन रवि योग का निर्माण हो रहा है। रवि योग सुबह 07 बजकर 15 मिनट से सुबह 08 बजकर 07 मिनट तक है। रवि योग का निर्माण तब होता है, जब चंद्रमा का नक्षत्र सूर्य के नक्षत्र से चौथे, छठे, नौवें, दसवें, तेरहवें या बीसवें में होता है। कुंडली में रवि योग के कारण व्यक्ति का मान-सम्मान और प्रभाव बढ़ता है। वह उच्च पद प्राप्त कर सकता है। खासकर इस दिन स्नान, दान, तप, जप, श्राद्ध तथा अनुष्ठान आदि का अत्यधिक महत्व है।
रवि योग में सूर्य पूजा करने से दूर होते हैं कष्ट
ज्योतिष बबीता रश्मि के अनुसार रवि योग में सूर्य पूजा करने से व्यक्ति के जीवन के कष्ट दूर होते हैं। सूर्य भगवान की कृपा से आयु और सेहत में वृद्धि होती है। रोगों से मुक्ति मिल सकती है। रवि योग के समय कोई कार्य करने पर उसमें सफलता प्राप्ति की संभावना अधिक होती है। सूर्य देव की पूजा रवि योग में करने से करियर में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होते हैं। मकर संक्रांति को सूर्य देव से जुड़ी वस्तुओं गुड़, लाल वस्त्रत्त्, घी, तांबा आदि का दान करना चाहिए।
काला तिल व गंगाजल मिलाकर करें स्नान
ज्योतिषाचार्य के अनुसार मकर संक्रांति के दिन पानी में काला तिल और गंगाजल मिला कर स्नान करें। इससे सूर्य की कृपा होती है और कुंडली के ग्रह दोष दूर होते हैं। ऐसा करने से सूर्य और शनि दोनों की कृपा मिलती है, क्योंकि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर मकर में प्रवेश करते हैं। आचार्य उपेंद्र शुक्ल कहते हैं कि हिंदू पंचांग के अनुसार 14 जनवरी को रात 2 बजकर 32 मिनट पर सूर्य मकर राशि में गोचर करेंगे और इस गोचर के बाद ही मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा। उदयातिथि के अनुसार मकर संक्रांति यानि खिचड़ी का त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाएगा।
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का महत्व
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति पर्व का बहुत महत्व है। मकर संक्रांति पर मकर राशि में सूर्य के प्रवेश के साथ ही शादी, गृह प्रवेश, घर बनाना, घर खरीदना और मुंडन आदि जैसे हर प्रत्येक शुभ कार्य शुरू कर दिए जाते हैं। रवि योग के शुभ फल को पाने के लिए अहंकार से दूर रहें। माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों का अनादर ना करें। अपने प्रभाव में वृद्धि के लिए सूर्य देव को पानी में लाल चंदन और लाल फूल डालकर अर्घ्य दें।
चुरा-तिलकुट का सजा बाजार
मकर संक्रांति को लेकर धीरे-धीरे चूड़ा, गुड़, तिलकुट व लाई का बाजार सजने लगा है। पहले लोग स्थानीय के साथ-साथ गया से तिलकुट मंगाते थे। किंतु शहर के मोहन बिगहा, बारह पत्थर, स्टेशन रोड समेत अन्य स्थानों पर तिलकुट निर्माण होने लगा है। ऐसे में बाजारों में तिलकुट की सोंधी महक भी लोगों को तिलकुट खरीदने को अपनी और खींच रही है। तिलकुट विक्रेता संतोष कुमार ने बताया कि सभी सामानों के दामों में बढ़ोतरी के कारण 120 रुपए किलो से लेकर 300 रूपए किलो तक के तिलकुट बाजारों में बिक रहे हैं।
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