- वैशाली का चयन किया गया है इस प्रोजेक्ट के लिए, पान उत्पादन में नवादा रखता है विशिष्ट स्थान
- जिले के पान कृषकों में देखी जा रही है इस घोषणा से खुशी, जल्द योजना को जमीन पर उतारने की मांग
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को मूर्तरूप देने के लिए वैशाली जिले को चयनित किया गया है। पान के पत्ते से तेल निकालने की इकाई नवादा में लगेगी। इस के साथ ही पान की खेती शेडनेट में करने की व्यवस्था होगी ताकि बेहतर उत्पादन प्राप्ति का रास्ता साफ हो। फिलहाल यह पायलट प्रोजेक्ट नालंदा के इस्माइलपुर स्थित पान अनुसंधान केन्द्र में बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित होगा। सरकार की योजना के अनुसार अगर यह प्रयोग सफल हुआ तो विभिन्न चयनित जिलों में इसे लागू किया जाएगा। वैशाली जिले के चयन प्रमुख जिले के रूप में किया गया है। पूरी संभावना है कि वैशाली जिले को इसका लाभ पहलेपहल मिल सकेगा। पान उत्पादकों को शेडनेट अनुदानित दर पर दिया जाएगा। इसमें सूक्ष्म सिंचाई यथा-ड्रिप के साथ फॉगर की व्यवस्था भी होगी। इस व्यवस्था से पान की उत्पादकता में खासी वृद्धि होगी। साथ ही पान से तेल निकालने की छोटी इकाइयां भी किसानों को दी जाएंगी। वैशाली के अलावा यह योजना मुख्य रूप से नालंदा, गया के साथ ही मधुबनी, नवादा , खगड़यिा, दरभंगा, भागलपुर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चम्पारण, औरंगाबाद, शेखपुरा, बेगूसराय, सारण, सीवान और मुंगेर के लिए लागू किया गया है। नई घोषणा का स्वागत करते हुए नवादा के पान उत्पादक कृषकों ने योजना को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने की मांग की है। उमेश चौरिसया, बिन्दा चौरसिया, उदय चौरसिया आदि ने सरकार की इस पहल को बेहद सराहनीय कहा है।
शेडनेट के होंगे कई फायदे
पान की खेती के लिए शेडनेट की स्थायी संरचना के अनेक फायदे होंगे। अभी के खर्चीले बरेठा निर्माण से निजात मिल जाएगी। सामान्यत: बरेठा का निर्माण बांस, पुआल, कास, सुतली के उपयोग से होता है, जो प्राकृतिक आपदा से बर्बाद हो जाता है। शेडनेट में पान की खेती करने से कीट-व्याधियों और मौसम के प्रकोप से बचाव हो सकेगा, जिससे पान की गुणवत्तायुक्त पत्तियों के उत्पादन में वृद्धि होगी। साथ ही इसमें किसान परवल, पेपची, मिर्च, लौकी, ककड़ी, पालक, अदरक आदि की खेती भी कर सकते हैं।
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