Tuesday, September 21, 2021

बच के रहना...

बहेलिया आएगा... दाना डालेगा...जाल बिछाएगा।

अविनाश मिश्रा। इस बार के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में तीन तरह के प्रत्याशी मैदान में हैं।
पहले वाले श्रेणी में वैसे प्रत्याशी आते हैं जो दारू व मुर्गा के बल पर मतदाताओं को छलते हैं । इसके साथ ही झूठे स्वांग रचने में उस्ताद हैं। उनके पास विकास का कोई एजेंडा नहीं है । वह इस लालच में चुनावी मैदान में उतरे  हैं कि कुछ बना लेंगे....
अपने परिवार को बनाने के चक्कर में वो जनता को नशेड़ी बना रहे हैं। बेरोजगार बना रहे हैं दूसरे शब्दों में कहें तो पिछलग्गू बना रहे हैं। बड़ी आसानी से लोग इनके छलावे में आ जा रहे हैं । ऐसे जनप्रतिनिधि हीं जनता को दो-चार दिन दारू मुर्गा खिला करके पांच सालों के लिए पंचायत को पंचशीर बना देते हैं। इनके पीछे ठीक ठाक भीड़ है । जो ऐसे प्रत्याशियों के पीठ पीछे अपनी शेखी बघारते रहे हैं कि आज तो गर्दा मचा दिए। ऐसे चापलूस लोग चालीसा पढ़ने में परंपरागत हैं। एक प्लेट मुर्गा और दो पैक दारू में दिन भर जिंदाबाद रहे हैं।
दूसरे श्रेणी के अंतर्गत ऐसे प्रत्याशी दिख रहे हैं जो दारू और गाँजा के दम पर चुनाव जीतना चाह रहे हैं। उनका चेहरा तमतमाया हुआ दिख रहा है। ऐसा लग रहा है कि उनकी आँखें जल्द ही शरीर को छोड़ कर बैकुण्ठ जाने ले लिए तैयार हो। ऐसे प्रत्याशियों के पीछे गाँव का वो युवा मतदाता होता है जो नया नया मतदाता बना है । ऐसे युवा मतदाताओं को लग रहा है कि गाँव की सभी समस्याओं का समाधान भइयाजी ही कर सकते हैं । वो बड़ी - बड़ी बाते कर रहे हैं। दिवास्वप्न दिखा रहे हैं। बहरहाल सच्चाई इसके विपरीत ही होता हैं। चुनाव के समय जो भइया जी विकास की बात करते हैं। शिक्षा व रोजगार का लालच देते हैं। भाई- चारे की बात करते हैं। वही विकास पुरुष की छवि वाले भइया जी चुनाव जीतने के बाद जनता को धुत्तकार करके भगा देते हैं।ऐसे तामस  प्रवृत्ति के लोग अपनी योग्यता का प्रमाण पत्र साथ लेकर घूम रहे हैं।
तीसरे श्रेणी में वैसे प्रत्याशी हैं जो गांजा नहीं धुकते । दारू और मुर्गा नहीं खिला रहे हैं। उनके पीछे भीड़ नहीं है। वह बड़ी शालीनता से अपनी बात रख रहे हैं।एक- एक मतदान से मिल रहे हैं । और लोगों से अपना समर्थन मांग रहे हैं।
उनके पास पंचायत के विकास का एक ध्येय है। लेकिन उनके पीछे भीड़ नहीं है। पंचायत के विकास का रास्ता किस ओर से निकलेगा यह भविष्य की बात है। लेकिन
ये तय करना पंचायत की जनता का काम है कि वो पंचायत को विकास के रास्ते पर ले जाना चाहते हैं या पंचशीर बना देना चाह रहे हैं।

देखिए! बहेलिया आएगा। दाना डालेगा। जाल बिछाएगा।लेकिन फंसना नहीं है।

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