Sunday, August 8, 2021

बटेर पालन को बिहार में ऊंचाई दिला रहे वैशाली के राजदेव राय

  • राजदेव उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, हरियाणा के किसानों को देते हैं टेक्निकल सपोर्ट
  • अक्टूबर 2011 में 10 हजार बटेर की क्षमता के साथ हैचरी की शुरूआत की थी
  • बिजली, लेबर पेमेंट, डीजल, रखरखाव आदि के बाद 50 हजार रुपया माह बचता
  • 500 बटेर पालन शुरुआत करने के लिए करीब 30 से 40 हजार रुपए की जरूरत होगी

बिहार में बटेर पालन को ऊंचाई तक पहुंचाने वाले मुकुंदपुर सरसई के राजदेव राय आज आपनी आर्थिक स्थिति भी मजबूत कर चुके हैं। जिले में वर्ष 2011-12 में बटेर पालन की शुरुआत राजदेव ने की थी। उस दौरान उन्हें वैशाली कृषि केंद्र के डॉ नरेंद्र कुमार और डॉ ब्रजेश शाही का काफी सहयोग मिला। नाबार्ड हाजीपुर और रोड सेफ्टी का भी इन्हें सहयोग मिला। बातचीत के दौरान राजदेव ने एक स्वर में कहा कि बटेर पालन ने मेरी आर्थिक स्थिति को ठीक किया। आज मेरे पास कई दो-चार पहिया वाहन हैं। पांच से छह लोगों को रोजगार भी दिया गया है। हैचरी से करीब 1500 किसान जुड़े हुए हैं। बटेर पालन का ख्याल कैसे मन में आया? इस पर राजदेव राय ने कहा कि वर्ष 2011-12 में नाबार्ड के प्रोजेक्ट के तहत 120 किसानों को ट्र्रेंनग देने की योजना बनाई गई थी। उस दौरान में प्रेम यूथ फाउंडेश्न से मैं जुड़ा था। इसलिए हमारी अगुवाई में सारा कार्यक्रम शुरू हुआ था। किसानों को प्रशिक्षित करने के साथ बटेर पालन को व्यावसायिक रूप देने का निर्णय लिया गया। इस काम में डॉ नरेंद्र कुमार और डॉ ब्रजेश शाही का काफी सहयोग मिला। नाबार्ड हाजीपुर और रोड सेफ्टी का भी काफी सहयोग मिला था। तब से आज तक इस क्षेत्र में पीछे मुड़कर नहीं देखा। 

कई राज्यों के किसानों को टेक्निकल सपोर्ट 

राजदेव आज उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, हरियाणा के किसानों को टेक्निकल सपोर्ट बटेर पालन के क्षेत्र में देते हैं। यही नहीं फीड मैनेजमेंट, रखरखाव, बाजार के साथ बटेर के स्वास्थ्य को कैसे ठीक रखा जा सकता है। इस पर भी उन्हें दिशा-निर्देश देते रहते हैं। बिहार में अन्य कितनी हैचरी काम करती है, इस पर उन्होंने बताया कि वैसे तो कई हैचरी हैं, जो काम करती हैं, लेकिन ज्यादातर सिजनल ही हैं। ये हैचरी सिर्फ ठंड के मौसम में ही बटेर का पालन करती हैं। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2011 में 10 हजार बटेर की क्षमता के साथ हैचरी की शुरूआत की थी, वर्तमान में 45 हजार चूजे हर महीने तैयार करता हूं। उन्होंने बताया कि बिजली, लेबर पेमेंट, डीजल, रखरखाव आदि के बाद 50 हजार रुपया महीने हमारा आसानी से बच जाता है। 

कोई भी कहीं भी कर सकता है शुरू 

राजदेव से सीख लेकर इनसे 50 किसान जुड़े हैं और बटेर पालन कर खुद की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रहे हैं। बटेर पालन कोई भी किसान अपनी पूंजी तथा जगह के हिसाब से शुरू कर सकता है। 100 स्क्वायर फिट के कमरे में 300 से 400 बटेर का पालन किया जा सकता है। पटेर पालन पिजड़ा और बिछावन पद्धति द्वारा भी किया जा सकता है। दोनों के अपने-अपने फायदे हैं। यदि कम जगह में करना चाहते हैं र्तो ंपजड़ा पद्धति में कम कर सकते हैं। 500 बटेर पालन शुरुआत करने के लिए करीब 30 से 40 हजार रुपए की जरूरत होगी, जिसमें गृह निर्माण, बर्तन, दाना-पानी और दवाई की आवश्यकता पड़ सकती है। एक बटेर एक वर्ष में करीब 150-180 अंडे देती है। 

बटेर, मशरूम की हरेक रेसिपी ऑनलाइन 

राजदेव राय ने बताया कि हाजीपुर के रामाशीष चौक पर लॉक डाउन की पहली लहर के बाद एक होटल की शुरुआत नवंबर महीने में की थी, जो लॉक डाउन के दौरान बंद हो गया। इसी होटल को फिर दूसरी लहर के बाद इस वर्ष जुलाई में शुरू किया है। कृषि विज्ञान केंद्र से तकनीकी सहयोग मिलता रहता है। किसानों के उत्पाद की अच्छी रेसिपी मिलती है। साथ में बटेर, मशरूम की हर एक रेसिपी मौजूद रहती हैं। ऑनलाइन डिलेवरी भी इसकी की जा रही है।

कम कीमत में अधिक गुणवत्ता वाला प्रोटीन 

बटेर पालन में वर्ष 2018 अभिनव पुरस्कार राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय में कुलपति की ओर से दिया गया। इस संबंध में उन्होंने कहा कि बटेर पालन उत्तम व्यवसाय है। खासकर भूमिहीन और सीमांत किसानों के लिए। बटेर पालन के दौरान हम नौजवानों को रोजगार के साथ-साथ कुपोषण की समस्या से भी निजात दिला सकते हैं। जैसा कि हम जानते हैं आज हमारे आहार से प्रोटीन नहीं मिल रहा है। बाजार में प्रोटीन पदार्थ अंडा, दाल, मछली आदि की कीमत ज्यादा है। यह गरीबों की पहुंच से दूर है, ऐसे हालात में यदि बटेर पालन किया जाए तो इसके अंडे के द्वारा हम अपने समाज में कम कीमत में अधिक गुणवत्ता वाले प्रोटीन को पहुंचा सकते हैं। 








 


 

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