निशुल्क है सभ्यता द्वार पार्क में प्रवेश
सभ्यता द्वार पार्क का दीदार कोई भी कर सकता है। इसके लिए कोई पैसा नहीं लगता है। प्रवेश पूरी तरह से निशुल्क रखा गया है। इसलिए यहां पर्यटकों की भीड़ हमेशा रहती है। विशेषकर शाम के समय इस पार्क की रौनक देखने लायक होती है। सुबह दस बजे से शाम के छह बजे तक सभ्यता द्वार पार्क में निशुल्क प्रवेश कर आनंद उठाया जा सकता है। पटना का यह सभ्यता द्वार मौर्यशैली के वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है। इसका निर्माण रेड एंड वाइट सैंड स्टोन से किया है। करीब एक एकड़ में सभ्यता एरिया में सभ्यता द्वार और आसपास का परिसर फैला हुआ है। जमीन परल एलईडी सीरीज लाइट की रोशनी का आर्कषण मनमोहने के लिए काफी है।
कैसे पहुंचे सभ्यता द्वार
गांधी मैदान के पास होने के कारण बहुत ही आसानी से सभ्यता द्वार के पास पहुंचा जा सकता है। यह ज्ञान भवन व बापूसभागार के ठीक पीछे है। एएन सिन्हा संस्थान के बगल से आनेजाने के लिए शानदार रास्ता बनाया हुआ है । सम्राट अशोक कन्वेंशन सेन्टर में 32 मीटर ऊंचे सभ्यता द्वार की झलक दूर से भी देखा जा सकता है। पटना के युवाओं का बीच यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। शाम के समय प्रेमी जोड़ें बड़ी संख्या में आते हैं। आर्कषक लाइट और साउंड के साथ ढलते हुए सुर्य को घंटों निहारते हैं।
सभ्यता द्वार की रमणीयता को मैंने भी नजदीक से निहारा
पटना में रहते हुए मुझे काफी दिन हो गए थे । घूमने के लिए कहीं नहीं गया था। इसलिए मन थोड़ा- थोड़ा सा असहज हो रहा था। फिर क्या था। एक साप्ताहिक अवकाश के दिन कार्यक्रम तय हुआ। लेकिन कहां जाना हा यह तय नहीं हुआ था। अपने मित्रों से सभ्यता द्वार की भव्यता और सुंदरता के संबंध में बहुत सुना था। मेरा भी मन था कि एक बार सभ्यता द्वार के रमणीयता को नजदीक से देखूं। एक दिन अपने के छोटे भाई अजीत को लेकर सभ्यता द्वार के दीदार करने के लिए निकल पड़े। तकरीबन शाम के चार बज रहे थे। वहां का नजारा बहुत ही अद्भूत था। धीमे -धीमे बजते हिंदी फिल्मों की धुन औक कलकल बहती गंगाजी की अविरल धारा मुबंई के गेटवे ऑफ इंडिया को टक्कर दे रहे थे। ठंड़ी-ठंड़ी बहती हवा और शहर के कोलाहल से दूर शांति का नजारा। अद्भूत। सभ्यता द्वार पार्क परिसर बहुत ही साफ-सुथरा था। यहां स्वच्छ भारत अभियान का असर देखा जा सकता है। इसके केयर-टेकर ने पार्क का पूरी-पूरा ध्यान रखा है। यह विशेषकर प्रेमीजोड़ों के लिए बहुत ही रमणीय स्थल है। अकेले जाने वाले स्वयं को कुठिंत महसूस कर सकते है। इसलिए अच्छा होगा कि जोडें में घूमने जाएं।






