माल फूंककर ज्ञान वाचने की कला में सिद्धस्त होना भी छात्र जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू होता है।और जो लड़का इस गुण में परांगत होता है वह कुछ ही दिनों में सबका चहेता बन जाता है।आज मैं जिस लड़के का उल्लेख कर रहा हूं उसके विचारों की गहराई को कभी नाप नहीं पाया। हालांकि की #BHU हॉस्टल में वह मेरा रूप पार्टनर था। हमदोनों एक दूसरे का बहुत सम्मान करते हैं।वो मेरे लिए श्रीकृष्ण जैसा है।पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान मेरे रूम पार्टनर सौरभ यादव ने मेरा भरपूर साथ दिया।
सौरभ इलाहाबाद के पास झुसी के रहने वाले यादव कूल शिरोमणि हैं और मैं बिहार के वैशाली का रहने वाला एक निरीह सुदामा।इलाहाबाद के जिस स्कूल में अमिताभ बच्चन की शुरुआती पढ़ाई हुई है उसी से सौरभ ने स्कूली पढ़ाई पूरी की।उसके जीवन में कई बार ऐसे मौके आए जब देश के शीर्षस्थ संस्थानों से नामांकन के लिए बुलावा आया लेकिन इस लड़के ने सबको एक के बाद एक ठुकरा दिया।शायद उसका नामांकन दूसरे संस्थानों में हो जाता तो मैं बनारस की फक्कड़ी को नजदीक से अनुभव नहीं कर पाता।
मैं सौरभ के तर्कशक्ति और घुमक्कड़ी का कायल हूँ। एक ही रूम में साथ रहने के बावजूद मैं इसके कौशल को परख नहीं पाया। मैं व्यक्तिगत रूप से इसके विचारों का सम्मान करता हूं। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में किसी को हाथ पैर तुड़वाने का काम हो ।किसी लड़के को धमकाने का कार्य करना हो।किसी को कंबल ओढना हो ...कंबल ओढ़ाने का तात्पर्य समझते ही हैं आप। या फिर किसी नाचीज़ को अपने बुलेट पर घुमाना हो ....इन सारे कार्यों में इस लड़के को महारत हासिल है।
इनसब से अलग इस लड़के को एक और मामले में महारत हासिल था।यह उच्च कोटि का प्रवचनकर्ता करता है।सभी बच्चे इसके मुखारविंद से ज्ञान का श्रवण करते थे । रात दस बजने का इंतजार हॉस्टल के कई लड़के किया करते थे।रात के दस बजने के बाद जब हॉस्टल अटेंडेंट रूम चेक करके चले जाते थे तब लड़कों का दरवाजा पीटना शुरू होता था।
दस बजने के बाद शुरू होता था ज्ञान का वाचन। असली वाला ज्ञान । ऐसा ज्ञान जिसकी प्राप्ति बहुत ही दुर्लभ होता है। हरेक प्रवचन करता अपने पूरे मनोयोग से वाचन करता है।जहां कोई बन्धन नहीं होता। सभी के विचारों को गंभीरता से सुना जाता है। भले उसपर अमल ना हो। विचारधाराओं का कोई टकराव नहीं होता। तहखाने में परे राज एक के बाद एक खुलते हैं। भविष्य की योजनाएं बनाई जाती है। और जहाँ लड़कों के रोने पर कोई हँसता नहीं है। बल्कि गंभीरता से उसकी बातों को सुनते हैं। और झूठी सांत्वना देते हैं। विद्यार्थियों के सत्संग के ऐसे ही विषय होते थे।
वैदिक सत्संग की तरह यह भी तीन से चार घंटो का कार्यक्रम होता है। बीयर से शुरू होने वाला यह कार्यक्रम माल फूंकने तक चलता था। प्रवचन का स्तर ब्रांड पर निर्भर करता था। Bacardi , Johnny walker , teacher's. , Blender pride , Jack Daniels जैसे ब्रांड मुख्य होते थे। इससे समझिए ज्ञान का प्रवाह कैसा होता था। कभी कभी वोदका और ब्रिज़र से भी लोग काम चलाते थे। अमूमन ऐसा कम ही होता था।जब तक खत्म नहीं हो जाता प्रवचन की अविरल धारा बहती रहती थी।
जैसे जैसे बोतल खुलता...जॉन आलिया, फैज़, बशीर बद्र, मिंटो एक साथ देखने और सुनने को मिलते। रोज यह कार्यक्रम तीन से चार घण्टे चलता था।
मैंने अपने जीवन में ऐसा फक्कड़ आदमी कभी नहीं देखा।विंध्याचल और बनारस की तंग गलियों में टॉप की स्पीड के साथ मुझे राइड पर ले जाता था। बनारस में अस्सी घाट पर रात में बैठकर ठंडी हवा का आनंद मैंने इसी लड़के के साथ लिया। सौरभ बेजोड़ इंसान हैं और इनके साथ बिताया गया हरेक पल मेरे लिए अविस्मरणीय।
नोट:- सौरभ के साथ रहने पर पहली बार मालूम हुआ कि लडकियां भी लड़कों को छेड़ती हैं। एक दिन की बात है । एक लड़की अचानक से बीमार हो गई।इस कारण कई दिनों से वह क्लास करने नहीं आ रही थी। लड़कों के लिए यह गम्भीर मसला था। कैंपस में उसके बीमार होने की चर्चा सुर्खियां बटोर रही थी। सौरभ ने किसी से उसका हाल पूछ लिया। यह खबर मन की गति से उसके पास पहुँच गई। उसने कहा अगर मेरी इतनी ही चिंता है तो एक बुके भेज देते।अगले दिन सुबह ताज़े ताज़े गुलाब का बुके उसके पास हाजिर था।
ऐसे अनगिनत खिस्से -कहानियां है जिसका मैं साक्षी हूँ।लड़कियों की बात कौन करता है ।मैडम भी कतार में थीं।भाई का जलवा था।चचा जो विधायक थे।आज जब दुनिया समाप्त होने की कगार पर है। बीते हुए पल जेहन में तरोताज़ा हो रहे हैं
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