Monday, September 19, 2022

हाजीपुर 2 पटना

महिला सीट छोड़ कर बैठिए
----------------------------------------------------------
हाजीपुर से पटना जाने वाली सरकारी बस खचाखच भरी हुई है। पैर रखने के लिए भी तिल मात्र जगह नहीं है। कंडक्टर लगातार यात्रियों को ठूसें जा रहे है। सभी जल्दी-जल्दी अपने गंतव्य स्थान तक पहुँचना चाह रहे हैं, इसलिए ये समस्या उनके लिए कोई विकट समस्या नहीं मालूम हो रही है।

बस का कंडक्टर बार-बार यात्रियों से बोल रहा है। महिला सीट छोड़ कर बैठिए। अगर चूक से कोई बैठ जा रहा है तो उसे कंडक्टर या यात्री सूचित कर रहे हैं कि ये महिला सीट है। महिला सीट छोड़ कर बैठिए। कितनी जागरूकता है! सरकारी बसों में दिव्यांग और वृद्धजन के लिए भी सीट निर्धारित होते हैं ताकि दिव्यांग यात्री आराम से यात्रा कर सकें। यात्रियों के सहूलियत के लिए सीटों के ऊपर महिला सीट, दिव्यांग सीट लिखा हुआ होता है लेकिन मैं जिस बस के अंदर चढ़ा हूँ, उसकी लिखावट थोड़ी धुंधली हो चुकी है।  ये क्या! इतनी भीड़ होने के बावजूद महिला सीट खाली है और दिव्यांग सीट पर कब्जा। 

व्यवस्था के प्रति लोगों की जागरूकता को देख रहे हो न बिट्टू। बड़े ही विनम्रतापूर्वक मैंने उस सज्जन से निवेदन किया । सर! ये सीट दिव्यांग के लिए आरक्षित है। उन्होंने अपनी सरसरी निगाहों से एक झलक देखा। उसके बाद उन्होंने लिखे हुए की ओर सिर घुमाया। ऐसा लग रहा है , उन्हें मेरी बातों पर भरोसा नहीं है। संकुचितता उनके चेहरे पर दिख रही थी । लेकिन मैं भी ढिठ बना हुआ था। कुछ सेकेंड के बाद वे सज्जन सीट छोड दिए। लपकते हुए मैं उस सीट पर बैठ गया। 
देख रहा हूँ कि महिला सीट अभी भी खाली है। कंडक्टर यात्रियों से कह रहे हैं कि महिलाएं आएंगी तो आपको उठना पड़ेगा। इससे अच्छा है आप दूसरी जगह देख लीजिए। यात्रियों के बीच गजब-गजब की बातें हो रही है।   कोई सोशल मीडिया पर चटिया रहा है तो कोई मौसम वैज्ञानिक बना हुआ है।  लेकिन यात्री चीते की बात नहीं कर रहे।

बातें और भी है।

No comments:

Post a Comment

पत्रकारिता 1

पत्रकारिता का जंतर-मं तR प्रेस विज्ञप्तियों का अपना मिजाज होता है अखबार के दफ्तरों में प्रेस ब्रीफिंग, प्रेस कॉन्फ्रेंस, प्रेस विज्ञप्ति बहु...