Wednesday, July 9, 2025

पत्रकारिता 1


प्रेस विज्ञप्तियों का अपना मिजाज होता है

अखबार के दफ्तरों में प्रेस ब्रीफिंग, प्रेस कॉन्फ्रेंस, प्रेस विज्ञप्ति बहुत ही जाने-पहचाने शब्द हैं। सबको पता होता है कि इनका क्या मतलब है। प्रेस ब्रीफिंग किसी खास घटना या आयोजन या ऐसी ही किसी गतिविधि को लेकर की जाती थी जिसमें खास घटना से जुड़े अपडेट को बताया जाता था या है। इसमें सिर्फ उस खास घटना से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं जिसे लेकर यह ब्रीफिंग की गई है। ये छोटी अवधि के कार्यक्रम हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बारे में हर कोई जानता है। यह पूर्व नियोजित कार्यक्रम है और इसकी तैयारी एक या दो दिन पहले से की जाती है। हालांकि कभी-कभी एक घंटे की सूचना पर भी प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई जाती है। इसमें सवाल-जवाब का लंबा दौर भी चलता है। पूछे जाने वाले सवाल इस बात पर निर्भर होते हैं कि प्रेस कॉन्फ्रेंस कौन कर रहा है। इसमें चाय-पानी का इंतजाम होता है। चाय-पानी का स्तर भी इस बात पर निर्भर करता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस कौन कर रहा है। 

प्रेस विज्ञप्ति कभी भी जारी होने वाला कागज है। यह सीधे अखबार के दफ्तर में पहुंचता है। पहले इस कागज को पहुंचाने कोई व्यक्ति आता था। आज से 30-40 साल पहले इस कागज को पहुंचाने वे लोग आते-जाते रहे थे जो आज बड़े-बड़े नेता बन बैठे हैं। अब इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रेस विज्ञप्ति आसानी से अखबार के दफ्तर या रिपोर्टर के पास पहुंच जाती है। प्रेस विज्ञप्तियों का लेन-देन ज्यादातर व्हाट्सएप और मेल पर होता है।

मोटे तौर पर प्रेस विज्ञप्तियां दो प्रकार की होती हैं। सरकारी और गैर-सरकारी। पहले के समय में इन दोनों विज्ञप्तियों में मूल फर्क यह होता था कि इनमें कोई फर्क नहीं होता था। दोनों तरह की विज्ञप्तियां एक काम अच्छे से करती थी और वह है हिंदी भाषा को अलोकप्रिय बनाना। 


सरकारी विज्ञप्ति 

सरकारी विज्ञप्तियों का मिज़ाज अलग होता है। इसमें सरकारी सूचनाएं होती हैं लेकिन इनकी भाषा सबसे अलग होती है। इन विज्ञप्तियों की भाषा में यदि अखबार में खबर लिखी जाए तो एक सप्ताह में सारे पाठक अखबार पढ़ना छोड़ देंगे क्योंकि सरकारी भाषा का अपना अंदाज है, अपनी शब्दावली है। यह आमतौर पर आम बोलचाल की भाषा से अलग होती है। इसमें इस्तेमाल किए गए शब्दों को समझना सबके बस की बात नहीं है। हालांकि अब सरकार की ओर से ऐसे प्रयास भी किए जा रहे हैं कि सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों को भी सामान्य शब्दों में तैयार किया जाए। लेकिन सरकार तो सरकार है, उसका हर काम अपनी ही शैली में होता है।


गैर सरकारी विज्ञप्ति 

ऐसी विज्ञप्तियां प्राइवेट कंपनियों की ओर से जारी होती हैं। कंपनियां इसमें अपने नए प्रोडक्ट, लांचिंग, इवेंट, अभियान आदि के बारे में खबरें देती हैं। कंपनियां अपने वार्षिक लेखा-जोखा भी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताती हैं। यह अंग्रेजी और हिंदी में होती हैं। इनकी भाषा सरकारी विज्ञप्तियों से थोड़ी बेहतर होती है। 

हर तरह के संस्थान विज्ञप्तियां जारी करते हैं। यह मीडिया को अपनी गतिविधियों की जानकारी देने का सबसे सस्ता और सुलभ माध्यम है। इससे अखबार और रिपोर्टर को भी खबर हासिल करने में आसानी हो जाती है। लेकिन अब अखबारों के प्रबंधन के लिए प्रेस विज्ञप्तियां सिरदर्द बन रही हैं क्योंकि यह खबरों की होम डिलीवरी है और जब खबरें रिपोर्टर के घर तक पहुंच रही हैं तो रिपोर्टर स्पॉट पर क्यों जाएं। इसलिए रिपोर्टरों को विज्ञप्तियां बहुत पसंद हैं लेकिन अखबार प्रबंधन इससे परेशान रहता है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि खबरें कमजोर होती जा रही हैं, घटनाओं की कवरेज नीरस हो रही हैं। 

पत्रकारिता 1

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