Tuesday, May 3, 2022

सोना का मास्क

अविनाश मिश्रा। आज बात सोने के मास्क की।
पटना के गांधी मैदान के पास स्थित ज्ञान भवन में तीन दिवसीय ज्वेलरी एग्जीबिशन का आयोजन किया गया था। इस ज्वेलरी एग्जीबिशन का उदघाटन बिहार के उद्योग मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन ने किया था।ज्ञान भवन में आयोजित हुई ज्वेलरी कनेक्ट नामक इस प्रदर्शनी को देखने के लिए पटनाइट्स उमड़ पड़े थे। इस ज्वेलरी एग्जीबिशन में सोने के आकर्षक कलेक्शन पेश की गई थी, जिसे पटनाइट्स ने खूब सराहा गया। बावजूद इसके ज्वेलरी एग्जीबिशन के बाद सोने का मास्क अब भी चर्चा पटनाइट्स के जुबान पर सिर चढ़कर बोल रहा है।
स्थानीय लोग इसकी कीमत और वजन जानने के लिए उत्सुक दिख रहे हैं।
शादी के इस सीजन में विशेषकर, सोने के बने इस मास्क का क्रेज अब तेजी से ट्रेंड्स कर रहा है, और लोग इसे खरीदने में बहुत दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
बता दें कि ज्वेलरी एग्जीबिशन के दौरान चार सोने का मास्क यहां लाए गए थे, उनमें से तीन की बुकिंग हो चुकी है।
● बीस साल तक पहन सकेंगे
सोने के बने इस मास्क के बारे में कहा जा रहा है कि, पैराशूट धागे से बने सोने का मास्क को 20 साल तक पहना जा सकता है । इस मास्क को सोने के मोतियों को धागे से बांधकर बनाया गया है। 22 कैरेट सोने का उपयोग इस मास्क को बनाने के लिए किया गया है। लग्न के इस सीजन में अब सोने का मास्क एक और गहने के रूप में ट्रेंड्स कर रहा है।
● वजन के अनुसार कीमत
ज्वेलरी एग्जीबिशन में सबसे ज्यादा चर्चा व आकर्षण सोने के मास्क की रही। इसे देखने के लिए कई नेता और अभिनेता भी वहां पहुंचे थे। ऐसे में बात इसके दाम की करें तो अलग-अलग वजन के अनुसार कीमत है। सोने के इस मास्क की कीमतों के बारे में बात करें तो 25 ग्राम वजन के सोने का मास्क 2.75 लाख रुपए में मिल रहा है। वहीं, 70 हजार से 1.50लाख के रेंज में भी सोने का मास्क उपलब्ध है।
● दिल्ली में पहली बार हुई थी पेश
सोने के इस मास्क के बारे में बताया जा रहा है कि साल 2020 में पहली बार दिल्ली में आयोजित एक एग्जीबिशन में पेश किया गया था। इसके बाद चंडीगढ़ में भी इसे खूब पसंद किया गया।लगातार इसके बढ़ते क्रेज को देखते हुए पटना के ज्वेलरी एग्जीबिशन में भी इसे पेश किया गया, जिसे पटनाइट्स ने हाथों - हाथ लपका।

Sunday, May 1, 2022

"जाना" हिंदी की सबसे खौफनाक क्रिया है

केदारनाथ सिंह जी कहते हैं," जाना हिंदी की सबसे खौफनाक क्रिया है।"

जब हम एक स्थान से दूसरे स्थान जाते हैं तो हमारा एक परिवार, जिनके साथ हमने जीवन का एक लंबा कालखंड बिताया है , उसे छोड़ना होता है। साथ ही एक ऐसे परिवार में आपका स्वागत किया जाता है, जो बिल्कुल ही अपरिचित होता है । वहां जानने वाला कोई नहीं होता है। उस नए परिवार में अगर कुछ साथ रहता है तो वह है आपका काम और आपके वे साथी जो हमेशा चट्टान बनके आपके पीछे खड़े रहते हैं। किसी का साथ छोड़ना हमेशा दुःखद होता है। लेकिन आपका साथी हीं सारथी बन जाए तो आप किसी भी दुविधा को बहुत ही आसानी से पार पा जाते हैं। पिछले महीने के 15 तारीख को मैंने " हिंदुस्तान"  छोड़ दिया। लेकिन हिंदुस्तान ने जो संस्कार दिए , जो सिखाया वह मेरे लिए अमूल्य है। वहां कार्यरत सभी लोगों से सीखने का मौका मिला। सबका साथ मिला। सबका प्यार मिला। सबसे सम्मान मिला।

पत्रकारिता 1

पत्रकारिता का जंतर-मं तR प्रेस विज्ञप्तियों का अपना मिजाज होता है अखबार के दफ्तरों में प्रेस ब्रीफिंग, प्रेस कॉन्फ्रेंस, प्रेस विज्ञप्ति बहु...